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मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

मेरी एक और मौत

मेरी मौत को
आत्महत्या का नाम न देना
यह तो एक कत्ल है
इस की शिनाख्त करवाना...
समाज के
हर उस ठेकेदार को
इस की सजा दिलवाना
जो मेरी आजादी पर
अपने नियमों का
पहरा दिए रहता था...
हर उस शख्स पर
जुर्माना लगाना
जिस ने मेरे अरमानों को
सहला सहला जवां किया
और परंपराओं की वेदी पर
नग्न कर शोषित किया
उस खास शख्स को
यातना जरूर देना
जिसने झूठे वादों की सेज पर
बार बार मेरा बलात्कार किया...
और हां
अंत में
यह घोषण करना न भूलना
कि
यह आत्महत्या नहीं थी
यह कत्ल था
वह भी अनजाने में नहीं
बल्कि
एक सोच समझी साजिश के तहत...

17 टिप्‍पणियां:

अनिल पाण्डेय ने कहा…

आपकी रचना में कटु सत्य है।

Dhiraj Shah ने कहा…

सुन्दर रचना मौत की।

संजय भास्कर ने कहा…

एक सोच समझी साजिश के तहत...

नरेश सोनी ने कहा…

आमतौर पर यही माना और समझा जाता है कि कोई कवि जब पत्रकार हो जाता है तो उसके भीतर उमड़ने वाली कविताएं सख्त होती चली जाती हैं। एक पत्रकार होकर आप इतनी सुंदर और भावविभोर करने वाली कविताएं लिख पा रही हैं। बधाई।

anshu ने कहा…

Gud yarrr......
very gudddd......
Isme toh aapne Dil hi khol kr rkh diya hai...:-)

Shekhar kumawat ने कहा…

yah hui na kuch khas bat

pasand aai aap ki ye kavita


waqay me bahut sundar

shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

Shekhar kumawat ने कहा…

yah hui na kuch khas bat

pasand aai aap ki ye kavita


waqay me bahut sundar

shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

M VERMA ने कहा…

तल्ख स्वर है
आक्रोश जायज है

सीमा सचदेव ने कहा…

एक सच्ची कडवाहट झलकती है आपके शब्दों में

भूतनाथ ने कहा…

kya kahun....marm tak utar gayi...!!

kunwarji's ने कहा…

bhutnaath ji,seema ji, or verma ji ne mere man ki baat keh di hai!

kunwar ji,

अजय कुमार झा ने कहा…

रचना के बारे में तो सबने कुछ न कुछ कह ही दिया है इसलिए मैं आपसे ब्लोग शीर्षक के बारे में कुछ कहना चाहूंगा । आपने शीर्षक में जानबूझ कर रास्ते को अलग तरह से लिखा है या कि ..मैं ही नहीं समझ पा रहा हूं ठीक से ..। आपका फ़ौलोवर वाला विजेट भी नहीं दिख रहा है ..अब अनुसरण कहां किया जाए । बहरहाल बहुत बहुत शुभकामनाएं आपको
अजय कुमार झा

वीनस केशरी ने कहा…

पढ़ कर लगा कोई दिल को भींच रहा हो

कुछ है जो मर्म को छू गया

दीपक 'मशाल' ने कहा…

bahut dinon baad koi achchhi kavita padhne ko mili
abhar..

Anil Pusadkar ने कहा…

सलाम करता हूं बेबाक कलम को।

arvind ने कहा…

यह आत्महत्या नहीं थी
यह कत्ल था
वह भी अनजाने में नहीं
बल्कि
एक सोच समझी साजिश के तहत...
.....रचना सत्य है।

nilesh mathur ने कहा…

बहुत ही मार्मिक कविता है, समाज के मुह पर एक तमाचा!