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रविवार, 4 अप्रैल 2010

तुम्हारी यादें...


तुम्हारी यादें...
मसिक धर्म सी
तकलीफ के साथ साथ
देती हैं नारित्व का अहसास।

तुम्हारी अनु

9 टिप्‍पणियां:

Shekhar kumawat ने कहा…

WESE ME AAP KE DIL KE JAJBAT KO NAHI SAMJH PAHUNGA FIR BHI

SABHDO KA JOD ACHA HE


http://kavyawani.blogspot.com/

SHEKHAR KUMAWAT \\\

अविनाश वाचस्पति ने कहा…

मासिक धर्म का तो धर्म है हर माह तकलीफ देना। परंतु बहुत से तो चाहकर भी इस मर्म को नहीं पा पाते हैं। पता नहीं नारीत्‍व के मर्म को मासिक धर्म से क्‍यों जोड़ा गया है, इसके अतिरिक्‍त भी स्‍नेह, ममता, सहनशीलता जैसे भाव भी तो नारी धर्म की पूरी व्‍याख्‍या करते हैं।

arvind ने कहा…

kam shabdon me hi aapne bhav pagat kar diya. achhi kavita.

M VERMA ने कहा…

सुन्दर एहसास नया प्रयोग्

Tarkeshwar Giri ने कहा…

Mashik chakra , Jeewan ka chakra hai , isiliy dharm hai.

त्रिपुरारि कुमार शर्मा ने कहा…

बहुत खुब !

nilesh mathur ने कहा…

शब्द आपके अपने है, हमें तो सिर्फ भाव समझना है, बहुत वेदना है, किसी की यादों से होती तकलीफ और कहीं ना कहीं सुकून भी है!

श्रद्धा जैन ने कहा…

bebas naari ke dard ka ..... bahut alag sa varanan

बेनामी ने कहा…

bhut sunder kaafi gahraai se mahsus kiya hi is dard ko